लक्ष्मी, आंदोलन-जीवी’ दल की सक्रिय सदस्या थी। वह दल के आह्नान मात्र से बस्ती की महिलाओं को क्षणों में इकट्ठा कर दल की पताका उठाकर चल पड़ती थी। बस्ती की वह सर्वमान्य नेता जो थी। एक दिन सड़क चलते एक डंपर ‘लक्ष्मी’ को कुचलकर भाग खड़ा हुआ। अफरा-तफरी मच गई। ‘आंदोलन-जीवी’ उस के दल का मुखिया झंडा और बैनर लेकर क्षेत्रीय थाने में जा धमका। नारे लगने शुरू हो गएµ&....
