पवन माथुर

पवन माथुर की कविताएं

लापता है कल से 

ब्लाक में सनसनी है 
लापता है वे कल से---! 
गली-नुक्कड़-दुकान-ठेलागाड़ी के पास 
उड़ती हवा के गुबार में लिपटे 
शब्द कह रहे हैं 
पूछते फिर रहे हैं 
अरे शनिवार को ---कल ही तो---
अरे आज दुपहरी, ही ---कुछ घंटे पहले ही तो---
लापता हैं लेकिन वे कल से 
क्या किसी धोखाधड़ी, चोरी में तो नहीं? 
कज़र् में डूबे तो नहीं 
लंबी ....

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