महाभूत चंदन रॉय

पीढि़या आमने सामने-एक बहस :

एक पत्थर हिंदी साहित्य समाज पर


हिंदी साहित्य इस समय स्पष्ट दो खेमों में बंटा हुआ है। एक वह खेमा है जो वैचारिक गोलबंदी के दायरे में स्वयं को सुरक्षित महसूसता है तो दूसरा इससे बाहर आने के लिए छटपटा रहा है। युवा रचनाकारों में दो बातें देखने को मिल रही है, पहली और रेखांकित करने वाली बात है इन रचनाकारों का सोशल मीडिया की शरण में चले जाना। अधि....
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