अग्निशेखर

पहाड़ और पहाड़

तुम मुझे 
अपने पहाड़ों की 
थोड़ी-सी शांति, धैर्य और दृष्टि दे दो

मैं तुम्हें अपने पहाड़ों की स्मृति दूंगा 
चीड़ों, देवदारों  के लोकगीत दूंगा
संगीत दूंगा 

देखना
बदरी-केदार की संन्यासिन हवाएं 
गुनगुनाएंगी 
हब्बाखातून और रसुल मीर के गीत
तब शायद समझेगी दुनिया 
मेरे पहाड़ों का नमक 
क्यों मुझे 
संसार को म....

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