दबी जुबान में कह रहे सब
दबी जुबान में कह रहे सब,
जान से बेचारा गया,
वो ईमानदार था,
शायद इसलिए मारा गया।
कर भरोसा कुर्सियों पर,
अंत तक सहता गया,
न्यायसंगत बात थी पर,
व्यवस्था से लड़ता गया।
बिन पते की चिट्ठियां थीं,
फाइलों में दब गईं
घूमती-फिरती रहीं बस,
जिक्र तक ही रह गईं।
शब्....
