‘पाखी’ की साहित्यिक सामग्रियों में अभूतपूर्व और सुखद परिवर्तन हुआ है। इसमें कोई संदेह नहीं है। पचास रुपए में एक सौ पचास पृष्ठों की बहुमुखी साहित्यिक सामग्री पाठकों का मन जीतने वाला और अनुगृहीत करने वाला है। पाठकों के पत्र दिलचस्प है। एक बात मुझे कहनी है- कई पत्रिकाओं में संपादकीय और अन्य लेख और पत्र पढ़कर एक प्रश्....
