प्राज्जल राय

दिल्ली

देखो धुंध की अभेद्य चादर में लिपटी हुई
ये दिल्ली है
भारत वर्ष की राजधानी
राजपथ बनाम जनपथ के संघर्षो के इतिहास
जिसके चेहरे पर दर्ज हैं।
शताब्दियों के खंडहर पर उगा नामचीन शहर
खांडव प्रस्थ का बुढ़ापा
और इंद्रप्रस्थ की जवानी साधे
स्वर्ण की नोंक पर टिका
सपनों की रंगीनियों में जीता है।
छवियों को बनाता-बिगड़ता है ये शहर
और छवियों के नीचे धंस जाता ....

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