प्रेम जनमेजय

संस्मरण 

हरिशंकर परसाई का त्रिकोण

 

22अगस्त को हरिशंकर परसाई की जयंती है। परसाई यदि आज सशरीर होते तो पिचानवे वर्ष के होते। कैसे दिखते परसाई पिचानवे वर्ष में! टूटी हुई टांग, झुर्रीदार चेहरा और विसंगतियों को बेधने को आतुर बूढ़ी आंखें। चेहरा कितना भी झुर्रीदार होता, दृष्टि कितनी भी मध्म होती पर प्रखर मस्तिष्क के साथ विकलांग श्रद्धा के दौर ....

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