एक अकेला लॉरेंस ही किस्मत का मारा नहीं था
लॉरेंस की गालियां बदस्तूर जारी थीं और मेरा अभियान भी कि आखिर यह विजय कौल को गाली क्यों देता है? जिस किसी से कुछ पूछता वही बताने से मुकर जाता। हर कोई डरा हुआ-सा दिखता।
सुगबुगाहटों के बीच पता चला कि लॉरेंस स्कूल का कर्मचारी नहीं है। वह रशीद की मैन-सप्लाई कं....
