शंहशाह आलम

जाबिर हुसेन हिंदी के उन लेखकों में हैं, जो गद्य की स्थिरता को तोड़ते आए हैं। भारतीय गद्य साहित्य पर गंभीर बात की जाए तो गद्य साहित्य में इन दिनों एक उदासी-सी महसूस की जा रही है। इस उदासी का यह मतलब कतई नहीं कि हिंदी में गद्य की किताबें छपकर नहीं आ रही हैं। खूब आ रही हैं, लेकिन कुछेक लेखकों की किताबों को छोड़ दीजिए, तो बाकी बचे हुए लेखकों के गद्य की भाषा ऐसी हो गई है जिसमें रवान....

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