गौतम राजऋषि 

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इस बात को वैसे तो छुपाया न गया है
सबको ये मगर राज बताया न गया है

पर्दे की कहानी है ये पर्दे की जुबानी
बस इसलिए पर्दे को उठाया न गया है

हैं भेद कई अब भी छुपे कैद रपट में
कुछ नाम थे शामिल सो दिखाया न गया है

अम्बर की ये साजिश है अजब, चांद के बदले
दूजे किसी सूरज को उगाया न गया है

हर्फो की जुबानी हो बयां कैसे वो किस्....

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