लेखन के शुरुआती सालों में किसी पुरस्कार या सम्मान की उम्मीद करना बेमानी और कभी हास्यास्पद है हालांकि युवा रचनाशीलता को प्रोत्साहित करने के लिए अब कुछ पुरस्कार हैं। अमूमन ऐसी चाहत भी नहीं होती है। रचनाकर्म का निकष तो स्वान्तः सुखाय है न कि किसी पुरस्कार या सम्मान की आकांक्षा। लेखन या रचनात्मकता उस बेचैनी व छटपटाहट से निजात दिलाती है जो हर पल उद्वेलित किए रहती है। ऐसे म....
