जब से हमलोगों ने होश संभाला, तीन बीघिया जमीन से अपनापन ही महसूस किया. जैसे तीन बीघिया जमीन का टुकड़ा नहीं- अपना ही कोई भाई-बांधव हो. तीन बीघिया में कभी अरहर की फसल लहलहाती तो कभी मकई की फसल. वक्त के साथ खेती का तरीका बदला. नकदी फसल पर जोर दिया जाने लगा. इस दौर में कई-कई सालों तक केले की फसल तीन बीघिया में रह जाती थी. वक्त के साथ और भी कई चीजें बदली. हमारा गांव आने-जाने का क्रम पहले त....
