साहित्यिक पत्रकारिता, राजनीतिक पत्रकारिता से अलग होती है। प्रायः कोई लेखक ही किसी साहित्यिक पत्र के संपादन का दायित्व उठा लेता है। उसका समकालीन बोध और संपर्क पत्रिका की बुनियाद खड़ी करते हैं।
रवींद्र कालिया ने समय-समय पर साहित्यिक पत्रिकाओं और संकलनों का संपादन किया। इनमें कुछ तो समादृत हुए जैसे ‘अमरकांतः एक मूल्यांकन’ और कुछ विवादस्पद रहे जैस....
