साहित्य की सजग-समर्थ पीढ़ी अपने आलोचक साथ लेकर आती है या फिर अपने भीतर से अपने आलोचक पैदा कर लेती है। नई सदी के शुरुआती वर्षों में आई कथा-पीढ़ी के युवा कथाकार-आलोचक राकेश बिहारी ने ‘युवा’ या ‘ताजा’ की चिप्पी हटाकर अपनी पीढ़ी का नामकरण कर लिया है--- ‘भूमंडलोत्तर पीढ़ी।’ इस नामकरण संस्कार की प्रस्तावना के साथ ही राकेश ने अपनी पीढ़ी की कथा-प्रवृत्तियों के सदके कुछ वर्ष....
