खिड़की से धूप उतर गई थी अब। अंधेरा होने को था। दिन अपनी पूरी लालिमा समेटे लगभग डूब रहा था। मैं कुछ देर खिड़की पर से झूलते नेट नुमा पर्दे को पकड़ कर खड़ी रही, फिर बालकनी में टहलने लगी ।
सुमित अब मेरे साथ काम कर रहा था। स्निग्धा मेहरा का रिसर्च स्कॉलर था। वही स्निग्धा मेहरा जो टीचर्स क्वार्टर स्थित अपने फ्लैट को वेकेट कर घर चली गईं थीं। किसी लम्बी छुट्टी पर। और फिर कभी नहीं ल....
