‘सुश्री अनिलप्रभा कुमार’ लगभग चालीस वर्ष पूर्व भारत से अमेरिका चली गई थीं। वह अपने बारे में लिखते कहती हैं कि चार दशक पहले एक पौधे को नई जमीन में रोपा गया। पौधा उगा और बढ़ा परंतु अपनी ही मिट्टी में लिपटा रह गया। हवा, पानी और धूप नए देश की थी। भावों की इस जमीन पर प्रकृति ने तो कोई सीमाएँ नहीं बाँधी इसलिए देर-सबेर इनकी आदत हो ही जाती है....। वह भारत के प्रति अपनी टीस प्रकट ....
