मदन कश्यप 

आलोचना के सज्जन पुरुष

लेखक दो तरह के होते हैं। पहले वे जिनकी भाषा में चमक होती है, जिनका शिल्प गहरा प्रभाव छोड़ता है और विचार आकर्षित करते हैं। दूसरे वे, जो प्रथम दृष्टया प्रभावित नहीं करते हैं अर्थात् जिनकी भाषा में आकर्षित करने वाली बात ऊपर चमक नहीं होती है, लेकिन थोड़ा धैर्य से उनको पढ़ो उन्हें निकट जाओ, उनके रचना संघर्ष को जीवन संघर्ष से जोड़ कर देखो तो धीरे-धीरे उनका महत्व सामने आता है, समझ में ....

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