मनीश बैघ की कहानियाँ प्रतिश्ठित पत्र-पत्रिकाओं में निरन्तर पढने को मिलती रहती है। इधर उनका यह दूसरा कथा संग्रह प्रतिश्ठित अमर उजाला के षब्द सम्मान से पुरस्कृत किया गया। इस संग्रह की कहानियाँ मैंने बहुत मनोयोग से पढी और इन उल्लेखनीय कहानियों पर अपनी पाठकीय प्रतिक्रिया व्यक्त करने से नहीं रोक पाया।
इस संग्रह में कुल पन्द्रह कहानियाँ षामिल हैं। एक बात जो इस स....
