स्वयं प्रकाश उस दौर के कहानीकार हैं, जिस दौर में अमानवीय होते समाज को मानवीय बनाये रखने के लिये आंदोलन और सामाजिक सरोकार अपने भरे-पूरे रूप में उपस्थित थे । समाज बदल रहा था, उसमें विकृतियां आ रही थीं लेकिन उस बदलाव को सही मार्ग पर ले चलने तथा विकृतियों को समाप्त करने के लिये संगठन सक्रिय थे । मनुष्य एकदम अकेला नहीं था, वह अपने परिवार, समाज तथा संगठन में शक्ति पाता था । उसकी च....
