लाल बेहाल माटी पढ़कर हिल गया। इस कहानी के साथ उन पाठकों को जॉर्ज ऑरवेल के उपन्यास ‘एनिमल फॉर्म’ और 1984 पढ़ना चाहिए ताकि राजनीति और साहित्य के असहज संबंधों का आकलन कर सकें। निरंकुश तानाशाही वाली यह राजनीति हमारे समय-समाज को कहां ले जा रही? इसमें, पद, पैसा, पावर और आपसी खींचातानी के अलावा है क्या? हिंसा, हत्या और असहिष्णु अमानवीयता का नंगा नाच--- कहानी से गायब होते चरित्रें की ....
