जिस दिन मानचित्र पर
जाति और धर्म की रेखाएँ खिंचना बंद होगी
उसी दिन से मनुष्यता के हक में ही सारे फैसले होंगे
वेदों की शुद्धता नष्ट नहीं होगी,
उसकी ऋचाएँ, मंत्र, श्लोक अपना अर्थ नहीं खो देंगे !
तब भी बरकरार रहेगी शिवतांडव की सार्थकता
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हिन्दी साहित्य की पत्रिकाओं की भीड़ में अलग पहचान बनाने वाली 'पाखी' का प्रकाशन सितंबर, 2008 से नियमित जारी है।