दिशाएं
अपने-आप पर
हैं आश्चर्य चकित
कि यह सब कैसे हो गया!
कि ऐसा तो होना
ही नहीं चाहिए था!
कि एक साथ इतनी
लड़कियों पर जुल्म!
बाप रे!
भारत-भाग्य-विधाता
क्या सो गए हैं?
लड़कियां
चुपचाप कर रही थीं प्रतिरोध
कि डंडे बरस पड़े
एकाएक आसमान से
नहीं-नहीं
दिशाओं के अपने हाथ हो गए हैं
जिन्हें अदृश्य शक्तियां
बरस....
