सुधीश पचौरी

उत्तर आधुनिकतावादी वातावरण में साहित्य

पिछली किश्त के आखिर में हमने उस उत्तर आधुनिकतावादी ‘सांस्कृतिक वातावरण’ ने  हमारे रोजमर्रा के अनुभवों व रचनात्मक अनुभवों की प्रक्रियाओं में बडे परिवर्तन पैदा कर दिए हैं-
इस सांस्कृतिक वातावरण में ‘मुख्यधारा का मीडिया’ व समकालीन  ‘सोशल मीडिया’ और उपभोक्तावादी संस्कृति उद्योग   की वस्तुओं (पण्यों )को वितरित करने वाला बाजार निर्णायक भूमिका निभाता है-<....

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