चाय की घूंट भरते हुए वे पत्नी से बोले- कैसी विडंबना है?एक ओर आग की लपटें तो दूसरी ओर जलप्रलय दोनों से ही जनता बेकल है। इस कठिन काल में सबको पता लग चुका होगा, कि सृष्टि का नियन्ता सर्वोपरि है। मानव चूका तो जीवन रूका समझो। -जी वो तो है ही। धरती पर मानव द्वारा प्रकृति का दोहन करने की विकृति ही इसका एकमात्र कारण है।
सुबह-सुबह लाॅन में बै....
