अभिषेक सौरभ

रमणिका गुप्ता की कविताओं में दलित-चेतना के स्वर

रमणिका गुप्ता का रचना-संसार बहुत विस्तृत है | उन्होंने कविता के साथ-साथ कहानी, उपन्यास, विमर्शात्मक व आलोचनात्मक लेखन-कार्य भी किया है | वे एक लंबे अरसे तक ‘युद्धरत आम आदमी’ पत्रिका के संपादन-कार्य से भी जुड़ी रही हैं | ‘अब मूरख नहीं बनेंगे हम’ के अतरिक्त उनकी अन्य कविता संग्रहों के नाम हैं- भीड़ सतर में चलने लगी है, तुम कौन, तिल तिल नूतन, मैं आजाद हुई हूँ, भल....

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