कौशल किशोर

कविता और कवि का आत्मसंघर्ष

मंगलेश डबराल से हमारी मुलाकात 1980 के आसपास हुई जब वे लखनऊ में अमृत प्रभात के साहित्य संपादक थे। करीब चार साल तक करीब से उन्हें जानने-समझने का मौका मिला। यह हम जैसे युवा रचनाकारों के भी बनने और आगे बढ़ने का दौर था। आज जब भी याद करता हूं, वह दौर लखनऊ के साहित्य समाज के लिए स्वर्णिम सा लगता है। बात 1983-1984 की है। कवि शमशेर बहादुर सिंह का अकसरहाँ लखनऊ आना होता था। वे आते औ....

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