(एक)
25-5-1985
प्यारे मदन,
आपका पत्र--- बड़ी प्रसन्नता हुई--- 5 के बाद
विस्तार-पूर्वक लिखूंगा।
हम तुम्हें अवसर याद करते हैं- शमीम को भी--- इधर 15 जुलाई तक हैं--- विस्तृत पत्र एक छात्र से (कु- किरण पांडे से) लिखवा लेता हूं। हां, कुल्टी में हम आपके लिए अलग से समय नहीं निकाल पाए---
तुम्हारा
नागार्जुन
सी/श्री वाचस्पति
जहरीखाल, जि- गढ़वाल-246139
(उत्तर प्रदेश)
7-6-1985
डियर मदन,
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